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गंगा से जुड़े नवीनतम शोध, अभियान, जानकारियां एवं विशेषज्ञों की राय
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गंगा नदी - गंगा में गंदगी से नाराज़ एनजीटी, बिहार सरकार पर लगाया 25 लाख का जुर्माना
‘नमामि गंगे’ और ‘स्वच्छ गंगा मिशन’ जैसे तमाम अभियान बिहार के धरातल पर आते- आते धराशायी हो जाते हैं. नतीज़ा वही गंदगी और प्रदूषण, जिसे गंगा न...
गंगा नदी - वरूणा नदी से गंगा में जा रहे अवैध रूप से काटे गए जानवरों के शव : एनजीटी
देश में नदियों में बढ़ते प्रदूषण का कारण अब फैक्ट्रियों, उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नदियों म...
गंगा नदी - गंगा दशहरा विशेष : दायित्व याद दिलाता गंगा दशहरा
ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, तिथि दशमी, हस्त नक्षत्र, दिन मंगलवार। बिंदुसर के तट पर राजा भगीरथ का तप सफल हुआ। पृथ्वी पर गंगा अवतरित हुई। ''ग अव्...
गंगा दशहरा विशेष - गंगा कब बनेगी लोक एजेण्डा?
आज गंगा दशहरा है। गंगा दशहरा मतलब ऐतिहासिक तौर पर गंगा अवतरण की तिथि; पारम्परिक रूप में स्नान का अवसर; उत्सव रूप में गंगा आरती का पर्व। इतिह...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – मेरे मैले स्वरुप का कारण मनुष्य का स्वार्थ है. अध्याय 18, श्लोक 35 (गीता : 35)
यथा स्वप्नं भयं शोकं विषादं मदमेव च । न विमुच्चति दुर्मेधा धृतिः सा पार्थ तामसी ।। गीता : 18.35 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :हे पार्थ ! दुष्ट बुद...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – मैं मनुष्य के जीवन की मुक्ति का आधार हूं. अध्याय 18, श्लोक 34 (गीता : 34)
यया तू धर्मकामार्थान्धृत्या धारयतेर्जुन । प्रसंगेन फलाकांक्षी धृतिः सा पार्थ राजसी ।। गीता : 18.34 श्लोक का हिन्दी अर्थ :परन्तु हे पृथापुत्र...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – मेरी निर्मलता का आधार मेरी अविरलता है. अध्याय 18, श्लोक 33 (गीता : 33)
धृत्या यया धारयते मनःप्राणेन्द्रियक्रियाः।योगेनाव्यभिचारिण्या धृतिः सा पार्थ सात्त्विकी ।। गीता : 18.33 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :हे पार्थ ! ज...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – एसटीपी को बालू क्षेत्र में विस्थापित नहीं करना तामसी ज्ञान है. अध्याय 18, श्लोक 32 (गीता : 32)
अधर्मं धर्ममिति या मन्यते तमसावृता । सर्वार्थान्विपरीतांश्च बुद्धिः सा पार्थ तामसी ।। गीता : 18.32 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :हे अर्जुन ! जो तम...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – मनुष्य ने मुझे मात्र उपभोग का साधन समझा हुआ है. अध्याय 18, श्लोक 31 (गीता : 31)
यथा धर्ममधर्मं च कार्यं चाकार्यमेव च ।अयथावत्प्रजानाति बुद्धिः सा पार्थ राजसी ।। गीता : 18.31 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :हे पार्थ ! मनुष्य जिस ...
वर्ष 2016 से बेहद घट चुकी है गंगा के पानी की गुणवत्ता – संकट मोचन फाउंडेशन रिपोर्ट
विगत तीन वर्षों में वाराणसी के अंतर्गत गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है. वाराणसी स्थित एक गैर-सरकारी संस्था संकट मोचन फाउंड...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदी तकनीक को समझे बिना, नदी संरक्षण व्यर्थ है. अध्याय 18, श्लोक 28 (गीता : 28)
अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोअ्लसः । विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यते ।। गीता : 18.28 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :जो कर्ता आयुक्...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – प्रशासन द्वारा किया जाता है, नदियों की समस्याओं को अनदेखा. अध्याय 18, श्लोक 27 (गीता : 27)
रागी कर्मफलप्रेप्सुर्लुब्धो हिंसात्मकोशुचिः । हर्षशोकान्वितः कर्ता राजसः परिकीर्तितः ।। गीता : 18.27 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :जो कर्ता आसक्त...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदी विज्ञान की गहराई के ज्ञान का होना आवश्यक है. अध्याय 18, श्लोक 26 (गीता : 26)
मुक्तसंगोअ्नहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितः । सिद्धयसिद्धयोर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते ।। गीता : 18.26 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :जो कर्ता स...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – अज्ञानी मनुष्य ही मूर्खतावश नदियों में अवजल प्रवाहित करता है. अध्याय 18, श्लोक 25 (गीता : 25)
अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम् । मोहादारभ्यते कर्मं यत्तत्तामसमुच्यते ।। गीता : 18.25 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :जो कर्म मोहवश शास्त्र...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – मनुष्य स्वार्थवश नदियों का दोहन कर रहा है. अध्याय 18, श्लोक 24 (गीता : 24)
यत्तु कामेप्सुना कर्म साहंकारेण वा पुनः । क्रियते बहुलासं तद्राजसमुदाहृतम ।। गीता : 18.24 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :परन्तु जो कर्म बहुत परिश्र...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदियों के सिद्धांतों के आधार पर मेरे गुणों को संरक्षित करो. अध्याय 18, श्लोक 23 (गीता : 23)
नियतं संगरहितमरागद्वेषतः कृतम् । अफलप्रेप्सुना कर्म यत्तत्सात्त्विक मुच्यते ।। गीता : 18.23 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :जो कर्म नियमित है और जो ...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदियों के प्राकृतिक सिद्धांतों को जानना आवश्यक है. अध्याय 18, श्लोक 22 (गीता : 22)
यत्तु कृत्स्नवदेकस्मिन्कार्यें सक्तमहैतुकम् । अतत्त्वार्थवदल्पं च तत्तामसमुदाहृतम् ।। गीता : 18.22 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :और वह ज्ञान जिससे...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदियों का शोषण करना अपराधिक कृत्य है. अध्याय 18, श्लोक 21 (गीता : 21)
पृथक्त्वेन तु यज्ग्यानं नानाभावान्पृथग्विधान् । वेत्ति सर्वेषु भूतेषु तज्ग्यानं विधि राजसम् ।। गीता : 18.21श्लोक का हिन्दी अर्थ :जिस ज्ञान क...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदी प्रबन्धन तकनीक की जानकारी होना ही सात्विकी ज्ञान है. अध्याय 18, श्लोक 19-20 (गीता : 19-20)
ज्ञानं कर्मं च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः । प्रोच्यते गुणसंख्याने यथावच्छृणु तान्यपि ।। सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते । अविभक्तं विभक्तेषु...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदी प्रबंधन की मौलिकता को नहीं समझना ही नदियों की समस्या है. अध्याय 18, श्लोक 18 (गीता : 18)
ज्ञानं ज्ञेयं परिज्ञाता त्रिविधा कर्मचोदना । करणं कर्म कर्तेति त्रिविधः कर्मसंग्रहः ।। गीता : 18.18 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :ज्ञान, ज्ञेय तथा...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – मेरी प्राकृतिक संरचनाएं विशिष्ट हैं. अध्याय 18, श्लोक 17 (गीता : 17)
यस्य नाहंकृतो भावो बुद्धिर्यस्य न लिप्यते । हत्वापि स इमाँल्लोकान्न हन्ति न निवध्यते ।। गीता : 18.17 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :जो मिथ्या अहंका...
मैला ढोने वाली खच्चर गाड़ी में बदल गयी है देश की धरोहर गंगा माई – वाटरमैन ऑफ इंडिया
“देश की राजनैतिक राजधानी (दिल्ली) का दम प्रदूषण के धुएं से घुट रहा है. आर्थिक राजधानी (मुंबई) की जीवनदायिनी नदियां नाले की शक्ल इख़्तियार कर ...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदियों के समाप्त होने से संस्कृति और संस्कार भी समाप्त हो जाएंगे. अध्याय 18, श्लोक 15-16 (गीता : 15-16)
शरीरवांग्मनोभिर्यत्कर्मं प्रारभते नरः । न्याय्यं वा विपरीतं वा पज्चैते तस्य हेतवः ।। तत्रैवं सति कर्तारमात्मानं केवलं तु यः । पश्यत्यकृतबुद्...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – ग्रंथों के आधार पर मेरे गुणों को संरक्षित करो. अध्याय 18, श्लोक 13-14 (गीता : 13-14)
पंच्चैतानि महाबाहो कारणानि निबोध में ।सांख्ये कृतान्ते प्रोक्तानि सिद्धये सर्वकर्मणाम् ।। अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम् । विविधाश्च ...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदियों की शक्ति ढाल की उपयोगिता को क्रमबद्धता से उपयोग करें. अध्याय 18, श्लोक 12 (गीता : 12)
अनिष्टमिष्टं मिश्रं च त्रिविधं कर्मण: फलम् । भवत्यत्यागिनां प्रेत्य न तु संन्यासिनां क्वचित् ।। गीता : 18.12 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :जो त्या...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – शारीरिक विज्ञान की भांति समझा जाए नदी विज्ञान को. अध्याय 18, श्लोक 11 (गीता : 11)
न ही देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः। यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते ।। गीता : 18.11 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :निःसंदेह किसी भी दे...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – मेरा स्वरुप आज भी पहले जैसा ही है. अध्याय 18, श्लोक 10 (गीता : 10)
न द्वेष्टयकुशलं कर्म कुशले नानुषज्जते । त्यागी सत्त्वसमाविष्टो मेधावी छिन्नसंशयः ।। गीता : 18.10 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :सतोगुण में स्थित बु...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदी तकनीक व्यवस्था के सभी सिद्धांत शास्त्र जनित है. अध्याय 18, श्लोक 9 (गीता : 9)
कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेअ्-र्जुन ।संग त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः ।। गीता : 18.9 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :हे अर्जुन !...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदियों के तकनीकी ज्ञान का अभाव होना, गंगा की समस्या है. अध्याय 18, श्लोक 8 (गीता : 8)
दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत् । स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं भवेत् ।। गीता : 18.8 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :जो व्यक्ति नियत क...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदियों का स्वरुप कल्याणकारी है. अध्याय 18, श्लोक 7 (गीता : 7)
नियतस्य तु संन्यासः कर्मणो नोपपद्यते । मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः ।। गीता : 18.7 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :निर्दिष्ट कर्तव्यों को ...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदियों को सजीव मानते हुए, उनके दोहन पर लगाए जाएं नियंत्रण. अध्याय 18, श्लोक 6 (गीता : 6)
एतान्यपि तु कर्माणि संग त्यक्त्वा फलानि च। कर्तव्यानीति में पार्थ निश्चितं मतमुत्तमम् ।। गीता : 18.6 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :इन सारे कार्यों...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदियों की पवित्रता के लिए भी बनायी जाएं नियमावली. अध्याय 18, श्लोक 5 (गीता : 5)
यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत् । यज्ञों दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम् ।। गीता : 18.5 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :यज्ञ, दान और तप रूप कर...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – मनुष्य स्वार्थवश प्रकृति का दोहन कर रहा है. अध्याय 18, श्लोक 3-4 (गीता : 3-4)
त्याज्यं दोषवदित्येके कर्म प्राहुर्मनीषिणः । यग्यदानतपःकर्म न त्याज्यमिति चापरे ।। निश्चयं श्रृणु मे तत्र त्यागे भरतसत्तम । त्यागो हि पुरुषव...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है –समस्त जीव-जगत की रक्षा करना मेरा उद्देश्य है. अध्याय 18, श्लोक 1-2 (गीता : 1-2)
काम्यानां कर्मणां न्यासं कवयो बिदुः। सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं बिचक्षणाः।। गीता : 18.1-2।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :अर्जुन ने कहा-हे महाबा...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – आर्थिक लाभ के उन्माद में तुम नदियों के प्रति श्रद्धा भाव भूल चुके हो. अध्याय 17, श्लोक 28 (गीता : 28)
अश्रद्धया हुतं दत्तं तपस्तप्तं कृतं च यत् । असदित्युच्यते पार्थ न च तत्प्रेत्य नो इह ।। गीता 17.28 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :हे पार्थ ! श्रद्ध...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – विश्व में एकमात्र मेरा जल ही औषधीय गुणों से युक्त है. अध्याय 17, श्लोक 26.27 (गीता : 26.27)
सद्भावे साधुभावे च सदित्येतत्प्रयुज्यते । प्रशस्ते कर्मणि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्यते ।। यग्ये तपसि दानें च स्थितिः सदिति चोच्यते । कर्म चैव ...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – मैं गंगा बेसिन के समस्त जीवों का आधार हूँ. नदियों का भू जल मेरा है. अध्याय 17, श्लोक 25 (गीता : 25)
तदित्यनभिसन्धाय फलं यग्यतप:क्रिया: । दानक्रियाश्च विविधा: क्रियन्ते मोक्षकाड्क्षिभि: ।। गीता 17.25 श्लोक का हिन्दी अर्थ :तत् अर्थात् ‘तत्’ न...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – गंगा में अनंत शक्तियां समाहित है. अध्याय 17, श्लोक 24 (गीता : 24)
ऊँ तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणास्त्रिविधः स्मृतः । ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यग्याश्च विहिताः पुरा ।। गीता : 17.24 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :ऊँ, तत...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – जीवनदायिनी नदियां लुप्त होने की स्थिति में हैं. अध्याय 17, श्लोक 23 (गीता : 23)
आदेशकाले यद्यानमपात्रेभ्यश्च दीयते । असत्कृतमवग्यातं तत्तामसमुदाहृतम् ।। गीता : 17.23 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :तथा जो दान किसी अपवित्र स्थान ...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – मेरे सतही और भूजल के स्तर का अंतर शून्य होना चाहिए. अध्याय 17, श्लोक 22 (गीता : 22)
यत्तु प्रत्युपकारार्थन फलमुद्दिश्य वा पुनः । दीयते च परिक्लिष्टं तद्दानं राजसं स्मृतम् ।। गीता : 17.22 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :किन्तु जो दान...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – बिना समर्पित भाव के व्यर्थ हैं करोड़ों की गंगा परियोजनाएं. अध्याय 17, श्लोक 21 (गीता : 21)
यत्तु प्रत्युपकार्थं फलमुद्दिश्य वा पुनः । दीयते च परिक्लिष्टं तद्दानं राजसं स्मृतम् ।। गीता : 17.21 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :किन्तु जो दान प...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदी जल वितरण के संतुलन को समझों. अध्याय 17, श्लोक 20 (गीता : 20)
दातव्यमिति यद्यानं दीयतेअ्नुपकारिणें । देशे काले च पात्रे च तद्यानं सात्विकं स्मृतम् ।। गीता : 17.20 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ : जो दान कर्तव्य...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – वैज्ञानिक आधार पर संतों से संवाद कर नदियों की समस्याओं का निदान करना चाहिए. अध्याय 17, श्लोक 19 (गीता : 19)
मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडया क्रियते तपः । परस्योत्सादनार्थं वा तत्तामसमुदाहृतम् ।। गीता : 17.19 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :मूर्खतावश आत्म उत्पीड़...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदियों की बढ़ती समस्याओं को समझना आवश्यक है. अध्याय 17, श्लोक 18 (गीता : 18)
सत्कारमानपूजार्थं तपो दम्भेन चैव यत् । क्रियते तदिह प्रोक्तं राजसं चलमध्रुवम् ।। गीता : 17.18 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :जो तप सत्कार, मान और प...
गंगा नदी और गीता – गंगा कहती है – नदियों की विभिन्न समस्याओं को नियंत्रित करने की सात्विक विधि को समझों. अध्याय 17, श्लोक 17 (गीता : 17)
श्रद्धया परया तमं तपस्तत्त्रिविधं नरैः । अफलाकांक्षिभिर्युक्तैः सात्त्विकं परिचक्षते ।। गीता : 17.17 ।।श्लोक का हिन्दी अर्थ :भौतिक लाभ को न...
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