गंगा नदी - गंगा की समस्याएं, STP का बालू-क्षेत्र में नहीं होना (भाग 4)
13. भूमि संबंधित समस्त समस्याओं का निदान, किसान और जनता-जनार्दन की विभिन्न समस्याएं तथा उनकी अनेक बीमारियों से मुक्तिलाभ एक साथ, बिना पैसे के स्थायी रूप से संभव है :
STP के लगभग समस्त स्थान एलुवियल मृदा पर अवस्थित हैं : बनारस के भगवानपुर, दीनापुर, रमणा, गोठहवाँ आदि किसानों से अधिग्रहित उपजाऊ भूमि, सैकड़ो-करोड़ों रू. की है. यह बालूक्षेत्र में मुफ्त प्राप्त होगा और यह भूमि जिसकी कोफिसियेंट ऑफ परमियैबलिटी 10 के ऊपर माइनस 5 पावड. सें.मी /से. है. 100 एमएलडी, एस.टी.पी. अवजल से सिंचाई के लिये कम से कम 1200 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता होगी और इस अवजल को बालूक्षेत्र में व्यवस्थित करने के लिये मात्र 10- 12 हेक्टर बालू की अनुपयोगी भूमि की आवश्यकता होगी. अत: STP के लिये भूमि-अधिग्रहण और सिंचाई के लिये भूमि की व्यवस्था, उनकी विभिन्न समस्याएं, वायु-मृदा-भूजल, पैथोजन्स, अनोरौविक-बैक्टीरियल-ग्रोथ, फूड-ग्रेड-प्रदूषण आदि की समस्त समस्याओं का निदान एक साथ, “तीन-ढाल सिद्धान्त” के तहत संभव है. भूमि की मृदा-गुण, इसके ढ़ाल, इससे सम्बन्धित भू और सतही जल आदि संरक्षित रखने अन्य समस्त समस्याओं का निदान एक साथ स्थायी रूप से हो सकता है.
14. विभिन्न प्राकृतिक शक्तियों का संतुलित उपयोग, शक्तिक्षय को न्यून रखते हुए करना :
बनारस में सीवर-पाइप की कुल लम्वाई 500 कि.मी.से ज्यादा होगी (सही आँकडा उपलब्ध नहीं है). इस सीवर का अधिकांश भाग गाद-अवसाद से भरा हुआ है क्योंकि बनारस में तीन नदियाँ, तीन दिशाओं की विभिन्न ढ़ाले, इनको ध्यान में नहीं रखते हुऐ सीवर-पाइप बिछा दिया गया और सीवर के गंगा में ऐसे जगह पर, उस तरीके से जोड़ा गया, जो गंगा के स्थैतिक, गतिज, टर्बुलेन्ट, सेकेंडरी-सर्कुलेशन आदि शक्तियों को विनष्ट करता हुआ और प्रदूषक को डाउन-स्ट्रीम में कई कि.मी. में फैलता है. इन सब को ध्यान में रखते हुए सीवर का डिजाइन होना है.

