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गंगा नदी - गंगा की समस्याएं : STP का बालूक्षेत्र में न होना (भाग-3)

  • By
  • U.K. Choudhary
  • October-03-2018

11. अवजल से सिंचाई करने पर मृदा-प्रदूषण का होना निश्चित है. इससे “ तीन-ढ्लान के सिद्धान्त” का क्रियान्वन मुक्ति दिला सकता है :

STP के असंशोधित जल को कार्बनिक, अकार्बनिक एवं जैविक भार से निर्मूल कर पाना प्रायः असंभव है. इसलिये इसके द्वारा सिंचाई करने पर मिट्टी के छिद्र में इनके प्रदूषित कण जमा हो जाते हैं,  जिससे खेत की मिट्टी की “जल-अवशोषण-शक्ति” न्यून होती जाती है. खेतों से अवजल दिन में अधिक सुखता है, परिणामस्वरुप मृदा के अपने “माइक्रोवस” मरते जाते हैं तथा मिट्टी के छिद्रों में संतुलित ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती है. इसे ही “सोइल-सिकनेश” , यानि मिट्टी का बीमार होना कहते हैं. अतः STP से निस्तारित समस्त अवषादों को व्यवस्थित कर  और BOD भार को 5 mg/ lit कर देने से, इनका उपयोग जल-जीवों के संवर्धन के लिये होगा.

The complete filtration of Organic, Inorganic and Microbiological pollutants through STP are extremely difficult to achieve. As such, the application of the pollutants from STP in the agriculture causes, the Sedimentation of the solid-particles of the effluent in the soil pores causing the reduction in natural percolation, filtration and thereby proper circulation of oxygen becomes difficult in the voids of the soil required for the proper yield. This problem is known as Sickness of the Soil. This situation is managed with the application of the Theory and the pollutants load, after the STP is managed by the Sand-bed, reducing the BOD load less than 5 mg/lit suitable for aquatic lives.

11. अवजल से सिंचाई करने पर मृदा-प्रदूषण का होना निश्चित
है. इससे “ तीन-ढ्लान के
सिद्धान्त” का क्रिया

12. “मृदा-प्रदूषण” से वातावरण एवं जीव-जगत की असंतुलितता मुख्य रूप से, जीनस्तर पर प्रभावित होती है :

मिट्टी का बीमार होना वायु को, अन्न को, खाद्य-पदार्थों को, भू-पेय-जल आदि को तो प्रभावित करता ही है, साथ ही यह  मानव सहित समस्त जीवों को अर्थात् सम्पूर्ण वातावरण को भी प्रभावित करता है. व्यवस्था की संतुलित क्रमबद्धता ही यह है कि “अपना ही मल-जल व्यवस्थित नहीं होने से अपने आप को ही बीमार कर देता है और मार देता है. अतः हर वस्तु को सही जगह और समय से व्यवस्थित करना और वह भी स्थिर-न्यूनतम खर्च में, आसानी से होने वाली तकनीक है. यही है STP के बाद बालूक्षेत्र से  और बालूक्षेत्र के निर्जन स्थान से, जल-प्रवाह के उच्च वेगस्थली से जल-जीवों को संतुलित आहार देना एवं अपने ही शरीर के मल-जल के सर्कुलेशन-सिस्टम को समझना. 

The Sickness of the Soil directly defines the Sickness of Air, Food-grains, Ground-Water, the Farmers and the Food-grains users. Hundreds of Farmers, suffering from various diseases, sold the vegetable which gives out bad-smell after cooking. In this way the Sickness of Soil of Dinapur area pollute, directly and indirectly the City of Varanasi. This acute problem of vegetable and food grain pollution exist in the entire regions of all the River-Systems of the Country. This, the River-Pollution is the fundamental cause of Mental-Pollution of the people.

यही है, मृदा प्रदूषण के कारण मानव-मष्तिष्क का बीमार होना तथा अशांत-मारकाट का जीवन हो जाना. इसी का सर्वोत्तम निदान है, “तीन-ढ़ाल का सिद्धान्त”.
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